आशा वासा संत का, ब्रह्मा लखै न वेद।
षट दर्शन खटपट करै, बिरला पावै भेद॥
संत की आशा और निवास को ब्रह्मा और वेद तक नहीं जान पाते। छहों दर्शन आपस में खटपट करते रहते हैं, पर उस भेद को कोई विरला ही पाता है।
साधु के लक्षण