जहाँ दया तहाँ धर्म है, जहाँ लोभ तहाँ पाप।
जहाँ क्रोध तहाँ पाप है, जहाँ क्षमा तहाँ आप॥
जहाँ दया है वहीं धर्म बसता है और जहाँ लोभ है वहाँ पाप। क्रोध पाप को जन्म देता है, जबकि क्षमा में स्वयं परमात्मा का वास है। मनुष्य के भाव ही उसके धर्म-अधर्म को तय करते हैं।
दया और परोपकार