दुर्बल को न सताइए, जाकी मोटी हाय।
बिना जीव की हाय से, लोहा भस्म हो जाय॥
कमजोर को कभी मत सताओ, उसकी आह बहुत भारी होती है। जैसे धौंकनी की निर्जीव फूँक से लोहा तक भस्म हो जाता है, वैसे ही निर्बल की आह विनाश कर देती है।
दया और परोपकार