संत कबीर दास
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दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, दुख काहे को होय॥

अर्थ

दुःख पड़ने पर हर कोई ईश्वर को याद करता है, पर सुख के दिनों में कोई नहीं। कबीर कहते हैं—यदि मनुष्य सुख के समय भी प्रभु का स्मरण करता रहे, तो उसके जीवन में दुःख आने का अवसर ही न आए।

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004

गुरु गोविन्द दोनों खड़े, काके लागूँ पाँय।
बलिहारी गुरु आपनो, गोविन्द दियो बताय॥

गुरु और ईश्वर दोनों सामने खड़े हों तो पहले किसके चरण छुऊँ? कबीर कहते हैं—गुरु ही श्रेष्ठ हैं, क्योंकि ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग उन्हीं ने दिखाया है। गुरु की महिमा ईश्वर से भी बड़ी है।

गुरु महिमा
001

दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, दुख काहे को होय॥

दुःख पड़ने पर हर कोई ईश्वर को याद करता है, पर सुख के दिनों में कोई नहीं। कबीर कहते हैं—यदि मनुष्य सुख के समय भी प्रभु का स्मरण करता रहे, तो उसके जीवन में दुःख आने का अवसर ही न आए।

भक्ति और नाम-स्मरण
052

हंसा मोती चुगत था, कुच्छ थार भराय।
जो जन मार्ग न जाने, सो तिस कहा कराय॥

हंस मोती चुगता है और थाल भरता जाता है। पर जो व्यक्ति मार्ग ही नहीं जानता, उससे कोई क्या करा सकता है? पात्रता के बिना अवसर भी व्यर्थ हो जाता है।

सत्संग और संगति
016

शीलवंत सबसे बड़ा, सब रतनन की खान।
तीन लोक की सम्पदा, रही शील में आन॥

शीलवान अर्थात् सदाचारी व्यक्ति सबसे बड़ा है—वह सभी रत्नों की खान है। तीनों लोकों की समस्त सम्पदा शील में ही समाई हुई है। चरित्र से बड़ी कोई पूँजी नहीं।

साधु के लक्षण
003

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर॥

हाथ में माला फेरते-फेरते युग बीत गया, पर मन की चंचलता और विकार नहीं बदले। कबीर कहते हैं—हाथ की माला छोड़ो और मन के मनके को फेरो; बाहरी दिखावे से नहीं, भीतर के सुधार से भक्ति होती है।

पाखंड और आडंबर
017

माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर।
आशा तृष्णा न मरी, कह गए दास कबीर॥

न माया मरी, न मन मरा—शरीर बार-बार जन्मते और मरते रहे। आशा और तृष्णा कभी नहीं मरीं। दास कबीर कहते हैं कि इच्छाओं का अंत ही असली मृत्यु से मुक्ति है।

माया और मोह

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संग्रह
संत कबीर के
802 दोहे
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संत कबीर दास

15वीं सदी के संत, कवि और समाज-सुधारक। कबीर ने जाति, कर्मकांड और दिखावे की भक्ति पर सीधे प्रश्न किए — और सत्य को दो पंक्तियों में कह देने की कला दी।

उनके दोहे आज भी पाठ्यक्रम, सत्संग और रोज़मर्रा की बातचीत में जीवित हैं। यह संग्रह उन्हें सरल अर्थ के साथ एक जगह लाता है। कबीर के बारे में और पढ़ें →

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