आया था किस काम को, तू सोया चादर तान।
सुरत सम्भाल ए गाफिल, अपना आप पहचान॥
तू इस संसार में किस काम के लिए आया था, और चादर तानकर बेसुध सो रहा है! हे लापरवाह मनुष्य, अपनी सुध सँभाल और अपने असली स्वरूप को पहचान।
मन और संयम