हीरा वहाँ न खोलिये, जहाँ कुंजड़ों की हाट।
बाँधो चुप की पोटरी, लागहु अपनी बाट॥
जहाँ साग-सब्जी बेचने वालों का बाजार हो वहाँ हीरे की गठरी मत खोलो। वहाँ चुप्पी की पोटली बाँधकर अपने रास्ते चल दो। ज्ञान अपात्र के सामने प्रकट करना व्यर्थ है।
ज्ञान और विवेक