कहना सो कह दिया, अब कुछ कहा न जाय।
एक रहा दूजा गया, दरिया लहर समाय॥
जो कहना था कह दिया, अब कुछ कहने को शेष नहीं। द्वैत मिट गया, केवल एक बचा—जैसे लहर दरिया में समा जाती है। यह अद्वैत-अनुभव की चरम अवस्था है।
ज्ञान और विवेक