कलि खोटा जग आँधरा, शब्द न माने कोय।
चाहे कहूँ सत आइना, सो जग बैरी होय॥
कलियुग खोटा है और संसार अंधा—कोई सच्चे उपदेश को नहीं मानता। जो दर्पण की तरह सच दिखा दे, संसार उसी को अपना शत्रु बना लेता है।
ज्ञान और विवेक