कुटिल वचन सबसे बुरा, जारि कर तन हार।
साधु वचन जल रूप है, बरसे अमृत धार॥
कठोर और कुटिल वचन सबसे बुरे हैं—वे शरीर और मन को जलाकर राख कर देते हैं। संत के वचन जल के समान हैं, जो अमृत की धारा बनकर बरसते हैं और शीतलता देते हैं।
वाणी और व्यवहार