ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय॥
ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जिसमें अहंकार न हो। ऐसे वचन दूसरों को शांति देते हैं और बोलने वाले का मन भी शीतल कर देते हैं। मधुर वाणी दोनों ओर सुख देती है।
वाणी और व्यवहार