जो तू चाहे मुक्ति को, छोड़े दे सब आस।
मुक्त ही जैसा हो रहे, बस कुछ तेरे पास॥
यदि तू मुक्ति चाहता है तो सारी आशाएँ छोड़ दे। जब तू मुक्त जैसा हो जाएगा, तब सब कुछ अपने आप तेरे पास होगा। इच्छाओं का त्याग ही मुक्ति का द्वार है।
संतोष और त्याग