साईं इतना दीजिये, जा में कुटुम समाय।
मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय॥
हे प्रभु! मुझे इतना ही दीजिए जिसमें मेरा परिवार भरण-पोषण पा सके—न मैं भूखा रहूँ और न मेरे द्वार से कोई साधु भूखा लौटे। यह संतोष और सादगी की प्रार्थना है, धन-संचय की नहीं।
संतोष और त्याग