आए हैं सो जाएँगे, राजा रंक फकीर।
एक सिंहासन चढ़ि चले, एक बँधे जात जंजीर॥
जो इस संसार में आया है वह जाएगा ही—चाहे राजा हो, गरीब हो या फकीर। कोई सिंहासन पर सवार होकर विदा होता है, कोई जंजीरों में बँधकर; पर जाना सबको है।
संतोष और त्याग