साईं आगे साँच है, साईं साँच सुहाय।
चाहे बोले केस रख, चाहे घोंट मुंडाय॥
प्रभु के सामने केवल सच्चाई चलती है, उन्हें सत्य ही भाता है। फिर चाहे कोई केश रखे या सिर मुँड़ा ले—बाहरी वेश से कुछ नहीं होता। भीतर की सच्चाई ही मायने रखती है।
पाखंड और आडंबर