ज्यों तिल माहीं तेल है, ज्यों चकमक में आग।
तेरा साईं तुझमें, बस जाग सके तो जाग॥
जैसे तिल में तेल छिपा है और चकमक पत्थर में आग—वैसे ही तेरा स्वामी तेरे ही भीतर बसा है। बस जाग सके तो जाग जा। ईश्वर बाहर नहीं, भीतर है।
पाखंड और आडंबर