जा कारण जग ढूँढ़िया, सो तो घट ही माँहि।
परदा दिया भरम का, ताते सूझे नाहिं॥
जिसे पाने के लिए सारा संसार छान मारा, वह तो अपने ही हृदय में है। बीच में भ्रम का परदा पड़ा है, इसीलिए वह दिखाई नहीं देता।
ज्ञान और विवेक