सोना, सज्जन, साधुजन, टूट जुड़ै सौ बार।
दुर्जन कुम्भ कुम्हार के, एके धका दरार॥
सोना, सज्जन और साधु—ये सौ बार टूटकर भी फिर जुड़ जाते हैं। पर दुर्जन कुम्हार के कच्चे घड़े जैसा है, एक ही धक्के में दरक जाता है और फिर नहीं जुड़ता।
सत्संग और संगति