सब धरती कागज करूँ, लेखनी सब बनराय।
सात समुद्र की मसि करूँ, गुरु गुण लिखा न जाय॥
सारी धरती को कागज बना लूँ, समस्त वनों को कलम और सातों समुद्रों की स्याही बना लूँ—तब भी गुरु के गुण लिखे नहीं जा सकते। गुरु की महिमा अवर्णनीय है।
गुरु महिमा