माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोय।
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूँगी तोय॥
मिट्टी कुम्हार से कहती है—आज तू मुझे रौंद रहा है, पर एक दिन ऐसा आएगा जब मैं तुझे अपने भीतर समेट लूँगी। अहंकार व्यर्थ है; अंत में सबको इसी माटी में मिलना है।
अहंकार और गर्व