दुखिया भूखा दुख कों, सुखिया सुख कों झूरि।
सदा अजंदी राम के, जिनि सुख-दुख गेल्हे दूरि॥
दुखी व्यक्ति दुःख में भूखा रहता है और सुखी सुख के लिए तरसता है। सदा आनंद में तो वे राम के जन हैं जिन्होंने सुख-दुःख दोनों को दूर कर दिया।
दया और परोपकार