काबा फिर कासी भया, राम भया रे रहीम।
मोट चून मैदा भया, बैठि कबीरा जीम॥
काबा ही काशी बन गया और राम ही रहीम हो गए। मोटा आटा छनकर मैदा हो गया—अब कबीर बैठकर आराम से भोजन कर रहा है। भेदभाव मिट जाने का उल्लास।
भक्ति और नाम-स्मरण