क्यूँ नृप-नारी नींदिये, क्यूँ पनिहारी कौ मान।
वा माँग सँवारे पील कौ, या नित उठि सुमिरै राम॥
रानी की निंदा और पनिहारिन का सम्मान क्यों? क्योंकि रानी केवल शृंगार में लगी रहती है, जबकि पनिहारिन नित्य उठकर राम का स्मरण करती है। मूल्य आचरण से तय होता है।
भक्ति और नाम-स्मरण