घाट जगाती धर्मराय, गुरुमुख ले पहिचान।
छाप बिना गुरु नाम के, साकट रहा निदान॥
घाट पर धर्मराज चुंगी लेने बैठे हैं, वे गुरुमुख को पहचान लेते हैं। गुरु के नाम की छाप के बिना नास्तिक वहीं रोक लिया जाता है।
गुरु महिमा