गुरु भक्ति अति कठिन है, ज्यों खाँड़े की धार।
बिना साँच पहुँचे नहीं, महा कठिन व्यवहार॥
गुरु-भक्ति तलवार की धार जैसी कठिन है। सच्चाई के बिना वहाँ पहुँचा नहीं जा सकता—यह अत्यंत कठिन व्यवहार है।
भक्ति और नाम-स्मरण