हिरदे ज्ञान न उपजै, मन परतीत न होय।
ताके सद्गुरु कहा करें, घनघसि कुल्हरन होय॥
जिसके हृदय में ज्ञान न उपजे और मन में विश्वास न हो, उसका सद्गुरु क्या करें? कितना ही घिसो, पत्थर कुल्हाड़ी नहीं बनता।
गुरु महिमा