निगुरा ब्राह्मण नहिं भला, गुरुमुख भला चमार।
देवतन से कुत्ता भला, नित उठि भूँके द्वार॥
बिना गुरु वाला ब्राह्मण अच्छा नहीं, गुरुमुख चमार अच्छा है। निष्क्रिय देवताओं से तो वह कुत्ता भला जो नित्य उठकर द्वार पर पहरा देता है।
गुरु महिमा