ऊँचे कुल में जामिया, करनी ऊँच न होय।
सोरन कलश सुरा भरी, साधु निंदा सोय॥
ऊँचे कुल में जन्म लेने से क्या, यदि करनी ऊँची न हो? सोने के कलश में भी यदि मदिरा भरी हो तो संत उसकी निंदा ही करते हैं। पात्र नहीं, भीतर की वस्तु महत्त्व रखती है।
साधु के लक्षण