ऋद्धि सिद्धि माँगो नहीं, माँगो तुम पै येह।
निसि दिन दरशन साधु को, प्रभु कबीर कहुँ देह॥
मैं ऋद्धि-सिद्धि नहीं माँगता, हे प्रभु! तुमसे बस इतना माँगता हूँ कि रात-दिन संतों के दर्शन होते रहें। कबीर की यही एकमात्र याचना है।
साधु के लक्षण