साबुन बिचारा क्या करे, गाँठे राखे मोय।
जल सो अरसाँ नहिं, क्यों कर ऊजल होय॥
बेचारा साबुन क्या करे, यदि उसे गाँठ में ही बाँधकर रखा जाए और जल से उसका स्पर्श ही न हो? फिर कपड़ा उजला कैसे होगा—गुरु का उपदेश भी लागू करने से ही फलता है।
गुरु महिमा