संत मता गजराज का, चालै बंधन छोड़।
जग कुत्ता पीछे फिरें, सुनै न वाको सोर॥
संत का मत गजराज जैसा है—वह बंधन तोड़कर अपनी चाल चलता है। संसार रूपी कुत्ते पीछे भौंकते फिरते हैं, पर वह उनका शोर सुनता ही नहीं।
साधु के लक्षण