संत मिले जानि बीछुरों, बिछुरों यह मम प्रान।
शब्द सनेही ना मिले, प्राण देह में आन॥
संत मिल जाएँ तो मैं उनसे बिछड़ूँ नहीं, चाहे प्राण ही क्यों न बिछड़ जाएँ। जब तक शब्द का स्नेही न मिले, तब तक प्राण देह में अटके ही रहते हैं।
साधु के लक्षण