सत को खोजत मैं फिरूँ, सतिया न मिलै न कोय।
जब सत को सतिया मिले, विष तजि अमृत होय॥
मैं सत्य को खोजता फिरता हूँ, पर सत्यनिष्ठ कोई नहीं मिलता। जब सत्य को सत्यवान मिल जाए, तब विष छूटकर अमृत बन जाता है।
गुरु महिमा