सतगुरु मिला जु जानिये, ज्ञान उजाला होय।
भ्रम का भाँड तोड़ि करि, रहै निराला होय॥
सतगुरु मिल गए, यह तभी जानो जब भीतर ज्ञान का उजाला हो जाए। तब भ्रम का घड़ा टूट जाता है और साधक निर्लिप्त हो जाता है।
गुरु महिमा