सतगुरु शरण न आवहीं, फिर फिर होय अकाज।
जीव खोय सब जायेंगे, काल तिहूँ पुर राज॥
जो सतगुरु की शरण में नहीं आते, उनका बार-बार काम बिगड़ता है। वे जीवन खोकर चले जाएँगे, क्योंकि तीनों लोकों में काल का ही राज है।
गुरु महिमा