शुकदेव सरीखा फेरिया, तो को पावे पार।
बिनु गुरु निगुरा जो रहे, पड़े चौरासी धार॥
शुकदेव जैसे को भी लौटा दिया गया, तो और कौन पार पाएगा? जो बिना गुरु के निगुरा रह जाता है, वह चौरासी की धारा में पड़ जाता है।
गुरु महिमा