सिष खाँडा गुरु भसकला, चढ़ै शब्द खरसान।
शब्द सहै सम्मुख रहै, निपजै शीष सुजान॥
शिष्य तलवार है और गुरु सान चढ़ाने वाला—शब्द की सान पर वह चढ़ता है। जो शब्द की चोट सहकर सामने डटा रहे, वही सुयोग्य शिष्य बनता है।
गुरु महिमा