आगे अंधा कूप में, दूजे लिया बुलाय।
दोनों बूड़े बापुरे, निकसे कौन उपाय॥
एक अंधा पहले ही कुएँ में गिरा था, उसने दूसरे को भी बुला लिया। दोनों बेचारे डूब गए—अब निकलने का उपाय कौन बताए?
गुरु महिमा
एक अंधा पहले ही कुएँ में गिरा था, उसने दूसरे को भी बुला लिया। दोनों बेचारे डूब गए—अब निकलने का उपाय कौन बताए?
गुरु महिमा
गुरु गोविन्द दोनों खड़े, काके लागूँ पाँय।
बलिहारी गुरु आपनो, गोविन्द दियो बताय॥
गुरु और ईश्वर दोनों सामने खड़े हों तो पहले किसके चरण छुऊँ? कबीर कहते हैं—गुरु ही श्रेष्ठ हैं, क्योंकि ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग उन्हीं ने दिखाया है। गुरु की महिमा ईश्वर से भी बड़ी है।
गुरु महिमाबलिहारी गुरु आपनो, घड़ी-घड़ी सौ सौ बार।
मानुष से देवत किया, करत न लागी बार॥
अपने गुरु पर मैं हर घड़ी सैकड़ों बार न्योछावर हूँ। उन्होंने एक साधारण मनुष्य को देवता के समान बना दिया और इसमें उन्हें देर भी न लगी। गुरु का संस्कार व्यक्ति को पूरी तरह बदल देता है।
गुरु महिमाकबीरा ते नर अंध हैं, गुरु को कहते और।
हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर॥
कबीर कहते हैं—वे लोग अंधे हैं जो गुरु को साधारण मनुष्य समझते हैं। यदि ईश्वर रूठ जाएँ तो गुरु शरण दे सकते हैं, किंतु गुरु ही रूठ जाएँ तो कहीं ठिकाना नहीं बचता।
गुरु महिमाराम रहे बन भीतरे, गुरु की पूजा ना आस।
रहे कबीर पाखंड सब, झूठे सदा निराश॥
जो राम को केवल वन में खोजता है और गुरु की सेवा-पूजा की परवाह नहीं करता, कबीर कहते हैं—वह सब पाखंड है। ऐसे झूठे साधक सदा निराश ही रहते हैं।
गुरु महिमा