आरत है गुरु भक्ति करूँ, सब कारज सिध होय।
करम जाल भौजाल में, भक्त फँसे नहिं कोय॥
आर्त भाव से गुरु की भक्ति करो, सारे कार्य सिद्ध हो जाएँगे। कर्म-जाल और भव-जाल में सच्चा भक्त कभी नहीं फँसता।
भक्ति और नाम-स्मरण