अंतर्यामी एक तुम, आत्मा के आधार।
जो तुम छोड़ो हाथ तो, कौन उतारे पार॥
हे प्रभु! तुम्हीं एकमात्र अंतर्यामी हो और आत्मा के आधार हो। यदि तुमने हाथ छोड़ दिया तो इस भवसागर से मुझे पार कौन उतारेगा? पूर्ण समर्पण का भाव।
भक्ति और नाम-स्मरण