घट का परदा खोलकर, सन्मुख दे दीदार।
बाल सनेही साइयाँ, आवा अंत का यार॥
हृदय का परदा हटाकर सामने दर्शन दे दो। हे बचपन के स्नेही स्वामी, तुम्हीं अंत तक साथ निभाने वाले सच्चे मित्र हो। भक्त की यह आर्त पुकार है।
भक्ति और नाम-स्मरण