बँधे मुआ रोगी मुआ, मुआ सकल संसार।
एक कबीरा ना मुआ, जेहि के राम अधार॥
बंधन में पड़ा मरा, रोगी मरा, सारा संसार ही मरता रहा। एक कबीर नहीं मरा, क्योंकि उसका आधार राम-नाम है। नाम का सहारा जिसे मिल जाए, वह अमर हो जाता है।
काल और मृत्यु