भगति बिगाड़ी कामिया, इंद्री केरै स्वादि।
हीरा खोया हाथ थैं, जनम गँवाया बादि॥
कामी व्यक्ति ने इंद्रियों के स्वाद के लिए अपनी भक्ति बिगाड़ ली। हाथ आया हीरा खो दिया और सारा जन्म व्यर्थ गँवा दिया।
भक्ति और नाम-स्मरण