दुनिया सेती दोसती, मुआ होत भजन में भंग।
एका एकी राम सों, कै साधु न के संग॥
दुनिया से दोस्ती करने पर भजन में विघ्न पड़ता है और जीवन यों ही बीत जाता है। नाता या तो अकेले राम से रखो या साधुओं के संग।
भक्ति और नाम-स्मरण