दुनिया के धोखे मुआ, चला कुटुम की कानि।
तब कुल की क्या लाज है, जब ले धरा मसानि॥
दुनिया के धोखे में और कुटुंब की लाज निभाते-निभाते मर गया। जब श्मशान में ले जाकर रख दिया जाएगा, तब कुल की कौन-सी लाज बचेगी?
काल और मृत्यु