कुल खोये कुल ऊबरै, कुल राखे कुल जाय।
राम निकुल कुल भेटिया, सब कुल गया बिलाय॥
कुल का अभिमान खो देने से कुल उबर जाता है और उसे पकड़े रखने से डूब जाता है। जो निष्कुल राम से मिल गया, उसका सारा कुल-भेद मिट गया।
भक्ति और नाम-स्मरण