हरिजन सेती रूसणा, संसारी सूँ हेत।
ते णर कदे न नीपजौ, ज्यूँ कालर का खेत॥
जो हरिभक्तों से रूठा रहता है और सांसारिक लोगों से प्रेम रखता है, वह कभी फलता-फूलता नहीं—जैसे ऊसर खेत में कोई फसल नहीं उगती।
साधु के लक्षण