मूरख संग न कीजिये, लोहा जलि न तिराइ।
कदली-सीप-भुजंग मुख, एक बूंद तिहँ भाइ॥
मूर्ख का संग मत करो, लोहा जल में तैर नहीं सकता। एक ही बूँद केले में कपूर, सीप में मोती और साँप के मुख में विष बन जाती है—पात्र के अनुसार परिणाम बदलता है।
सत्संग और संगति