माषी गुड़ में गड़ि रही, पंख रही लपटाई।
ताली पीटै सिरि घुनै, मीठै बोई माइ॥
मक्खी गुड़ में धँस गई और उसके पंख उसी में लिपट गए। अब वह हाथ मलती और सिर धुनती है। मीठे लोभ में फँसकर जीव ऐसे ही छटपटाता है।
माया और मोह