जब लग नाता जगत का, तब लग भक्ति न होय।
नाता तोड़े हरि भजे, भगत कहावें सोय॥
जब तक संसार से आसक्ति का नाता बना है, तब तक सच्ची भक्ति नहीं होती। जो मोह का नाता तोड़कर हरि का भजन करे, वही सच्चा भक्त कहलाता है।
भक्ति और नाम-स्मरण