जहाँ काम तहाँ नाम नहिं, जहाँ नाम नहिं वहाँ काम।
दोनों कबहूँ नहिं मिले, रवि रजनी इक धाम॥
जहाँ वासना है वहाँ नाम नहीं टिकता, और जहाँ नाम है वहाँ वासना नहीं रहती। ये दोनों कभी एक साथ नहीं मिलते, जैसे सूर्य और रात्रि एक स्थान पर नहीं रह सकते।
भक्ति और नाम-स्मरण